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Wednesday, 15 February 2023

ये मन



तेरे पलकों के झरोखें पे अटका हुआ ये मन 
 तेरे घने केशों में उलझा रहा ये मन 

 नटखट एक बच्चे की मुस्कान है तू 
 बिन डोर के पतंग की उड़ान है तू 
 लोहरी की रात की आग है तू
 होली की मनचली गुलाल है तू

 इस मतलब की दुनिया में, बेमतलब बातें करना चाहता ये मन 
 रुई के फाहें की तरह, अज्ञात उड़ान भरना चाहता ये मन 

 कड़ी धूप में मीठी छांव है तू 
 टूटते तारे को देख मांगी मुराद है तू
 शर्माती दुल्हन की अनकही हाँ है तू 
 नींद को भिंगोता हुआ ख्याब है तू 

 इस महफिल में शायर बहुत है, जानता ये मन
 पर हार मानेगा नहीं, ऐसा बावरा ये मन

 मेरे जिस्म की रूह है तू 
 बेखयाली में भी ख्याल है तू 
 गैरों में अपनी है तू 
 मेरे दिल की हर धड़कन है तू। 

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