तेरे द्वारा निर्मित फूलों को, क्या करू तुझे ही अर्पण
बस ऐसे ही मान लो मेरे दिल से नमन
तेरे दिए रंगों से क्या बनाऊ रंगोली का चमन
कलाकारी नहीं आती , बस गा सकती प्रेम का वंदन
तेरे दिए सुरों से क्या रचूं मधुर गीत का गगन
स्वर का ज्ञान नहीं , बस तुझे निहारने में मैं मगन
तेरे दिए ज्योति से क्या सजाऊँ अंधियारे का आँगन
शिल्प का ज्ञान नहीं , बस प्रेम का दूँ दर्पण
तेरे दिए सागर से क्या भरु अमृत का कलश
विधि का ज्ञान नहीं , बस यही कश्मकश
तेरे द्वारा निर्मित फूलों को क्या करू तुझे ही अर्पण
बस ऐसे ही मान लो मेरे दिल से नमन
निहारिका प्रसाद





